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शुद्धता जो महसूस हो

Naldehra Farmers Desi Ghee — Pure & Traditionally Made

मशीनों के दौर में, परंपरा और शुद्धता का असली स्वाद!

हमारी खासियत: बिना मथनी, शुद्ध मिट्टी के घड़े से तैयार पारंपरिक मक्खन और घी!

100% Pure Ghee.
Pure Niyat.

Zero
Additives

Jar of pure Himalayan desi ghee made using traditional matka shaking method

Why Choose Naldehra Farmers Ghee

Naldehra Farmers desi ghee is made using...

Pure & Natural

No added
preservatives

Rich Aroma

Goodness for a
healthier you

Himalayan Purity

From our valleys
to our home

Trusted by Families

A tradition of health
and happiness

शुद्ध देसी घी — Tradition in Every Spoon

हिमाचली देसी गाय के शुद्ध दूध से बना हमारा देसी घी पारंपरिक मटका विधि से तैयार किया जाता है, ताकि इसके प्राकृतिक पोषक तत्व, बेहतरीन खुशबू और असली स्वाद बरकरार रहें।

100% Pure Desi Ghee

पारंपरिक तरीके से तैयार शुद्ध देसी घी

₹ 850

/500gm

“Pehle Aap. Phir Hum. Phir Main. क्योंकि आपका घर पहले, आपकी सेहत पहले, और आपका भरोसा सबसे पहले। आप से हम, और हम से मेरा सपना। Pure ghee. Pure niyat.”

हमारे गाँव की अनोखी परंपरा — The Clay Pot Method

बिना मथनी (without Bilona Method), सिर्फ मिट्टी के घड़े से मक्खन निकालने की जादुई कला

आज जब लोग ‘बिलोना घी’ और ‘पारंपरिक घी’ के नाम पर मशीनों और आधुनिक उपकरणों की बात करते हैं, तब हमारे भारत के गाँवों में एक ऐसी प्राचीन और अद्भुत तकनीक आज भी जीवित है जिसमें किसी औजार या लकड़ी की मथनी (रई) की भी जरूरत नहीं पड़ती।

यह कहानी है मिट्टी के घड़े, शुद्ध दही और हाथों के जादू की, जिससे दुनिया का सबसे शुद्ध और स्वादिष्ट मक्खन तैयार होता है।

इस पारंपरिक विधि में किसी लकड़ी की मथनी का उपयोग नहीं किया जाता। इसकी पूरी प्रक्रिया इस प्रकार है:

मिट्टी के घड़े में दही जमाना: सबसे पहले शुद्ध देसी गाय या भैंस के दूध को उबालकर मिट्टी के घड़े (मटके) में प्राकृतिक रूप से रातभर के लिए जमाया जाता है।
घड़े को आगे-पीछे हिलाना (Pot Shaking): सुबह, जमे हुए दही वाले मिट्टी के घड़े को दोनों हाथों से पकड़कर एक खास लय में आगे-पीछे हिलाया (डोलकर) जाता है।
मिट्टी का प्राकृतिक घर्षण: जब दही घड़े के भीतर आगे-पीछे घूमता है, तो मिट्टी की खुरदरी अंदरूनी दीवारें प्राकृतिक घर्षण (Natural Friction) पैदा करती हैं। यही घर्षण दही में से मक्खन को अलग करने का काम करता है
मक्खन का तैरना: कुछ ही मिनटों की इस मेहनत के बाद, सारा शुद्ध और सफेद मक्खन तैरकर घड़े के ऊपर आ जाता है।

Fresh butter extracted from clay pot using traditional hand-shaking method

बिलोना विधि से भी बेहतर क्यों है यह तरीका?

शून्य ऊष्मा (Zero Heat):

जब हम लकड़ी या मशीन से दही मथते हैं, तो रगड़ से हल्की सी गर्मी पैदा होती है जो मक्खन के पोषक तत्वों को प्रभावित कर सकती है। लेकिन घड़े को सिर्फ हिलाने से दही पूरी तरह ठंडा रहता है, जिससे मक्खन का स्वाद और महक बेमिसाल होती है।

मिट्टी के गुण:

मिट्टी के घड़े में रहने के कारण छाछ और मक्खन में मिट्टी के प्राकृतिक मिनरल्स (खनिज) मिल जाते हैं, जो सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं।

एक विलुप्त होती कला:

यह सिर्फ मक्खन निकालने का तरीका नहीं है, बल्कि एक कला है जिसके लिए हाथों के सही संतुलन और अनुभव की जरूरत होती है।

आज के इस मशीनरी युग में, हमारे गाँव का यह पारंपरिक और जैविक (Organic) तरीका हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है। इस विधि से बना घी और मक्खन ही असली अमृत है।

हमारी खासियत: बिना मथनी, शुद्ध मिट्टी के घड़े से तैयार पारंपरिक मक्खन और घी

हम आपके लिए लेकर आए हैं भारत के ग्रामीण अंचलों की वह लुप्त होती शुद्ध परंपरा, जहाँ घी बनाने के लिए किसी मशीन या लकड़ी की मथनी का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता।

हमारे यहाँ मिट्टी के घड़े में जमे हुए शुद्ध दही को हाथों से आगे-पीछे हिलाकर (Shaking Method) प्राकृतिक घर्षण के जरिए मक्खन निकाला जाता है। मिट्टी की दीवारों से टकराकर ठंडी विधि से निकला यह मक्खन अपने सभी पोषक तत्वों, विटामिंस और असली सुगंध को समेटे रखता है। इसी मक्खन को धीमी आंच पर पकाकर हम तैयार करते हैं शत-प्रतिशत शुद्ध, दानेदार और सेहतमंद घी।

मशीनों के दौर में, परंपरा और शुद्धता का असली स्वाद!

Six slow steps. One honest jar.

प्रकृति से आपके घर तक
Himachali desi cow — source of pure milk for our ghee

शुद्ध दूध

from healthy cows

Curd naturally fermented overnight in a clay pot

दही

Naturally Fermented

Traditional clay pot used for churning butter without a machine

मिट्टी का घड़ा

Traditional Method

Pure hand-churned white butter separated by natural friction

मक्खन

Traditional Hand Churned

Butter being slow-cooked on low flame to make ghee

धीमी आंच पर पकाना

On low flame

Golden, granular pure desi ghee, the final product

शुद्ध देसी घी

Rich in aroma

Good to know

Questions about our desi ghee

What makes Naldehra Farmers ghee different?

Our ghee begins with Himachali desi-cow milk. The curd is set in a clay pot, then the pot is moved by hand so natural friction separates the butter—without a machine or wooden churner.
Milk is boiled and naturally set into curd overnight in a clay pot. The pot is rhythmically moved by hand until butter rises, then that butter is slowly cooked into fragrant, granular ghee.
The product is presented as pure desi ghee with zero additives—made from milk, fermented curd and traditionally extracted butter.
Pure Himalayan Desi Ghee is priced at ₹850 for a 500ml jar.
A Healthier India Starts with Happier Farmers

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